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प्रधानमंत्री भारतीय जनऔषधि केंद्र पर जागरूकता - एक महिला दिवस का तोहफा

इस महिला दिवस पर हमने लखनऊ के चौक, राधाग्राम में हमारे समुदाय की कुछ महिलाओं के साथ एक छोटी सी बातचीत करने का फैसला किया। "परपंच" ने कहानियों के साथ शुरू किया कि कैसे उनके बच्चे बड़े हो रहे थे और उनके जीवन के उपाख्यान बता रहे थे कि कैसे उन्होंने अपना बचपन बिताया। यह उस तनावपूर्ण दुनिया से विराम लेने का प्रयास था, जिसमें हम जीते हैं और वर्तमान समय को महत्व देने के लिए सीखे गए अच्छे समय की याद दिलाते हैं।

इस सब के बीच, हम इस बात पर भी गए कि मेडिकल शॉप के मालिक किस तरह से महिलाओं को मेडिकल फेस मास्क महंगे दाम पर दे रहे हैं। यह बात इस राह पर चली गयी कि कैसे दुकान के मालिक उनकी कमजोर आर्थिक स्थिति और महिला होने के कारण उन्हें द्वितीय श्रेणी के नागरिक मानते हैं। बस तब हमने प्रधानमंत्री भारतीय जनऔषधि केंद्र (BJAK) का उल्लेख किया ताकि यह आंकलन किया जा सके कि क्या यह लोग उसका प्रयोग करते हैं और क्या वहां भी ऐसा होता है ? कुछ अनुमानों के बाद कि यह क्या है, उन्होंने निष्कर्ष निकाला कि उन्होंने इसके बारे में सुना था लेकिन यह नहीं जानते कि यह क्या है या यह कहाँ है। हममें से एक ने ऑनलाइन खोज की और पता लगाया की निकटतम BJAK कहा था और पता चला की इस स्थान से 800 मीटर की दूरी पर ही था। महिलाओं को जेनेरिक दवाओं की अवधारणा और इसे BJAK से कैसे खरीदा जा सकता है, के बारे में बताया गया। उन्हें हेल्पलाइन 1800-180-8080 के बारे में बताया गया जहां वे शिकायतों के लिए संपर्क कर सकते हैं। महिलाएं विभिन्न दवाओं की कीमतों के बारे में जानने के लिए इतनी उत्सुक थीं कि वे दिखाने और पूछने के लिए अपनी दवा की पट्टी ले आईं। जबकि इस बदलाव के लिए महिलाओं में उत्सुकता देखना अच्छा था।

एक दिलचस्प बातचीत ने उत्साह और स्वामित्व की भावना को स्पष्ट किया।
W1 - "बहुत  दूर  है ... अब जाना मुसकिल होगा"
W2 - "अमा एक तो सस्ती दावा मिल रही और सुकून से मिल रही है, अब उसमे भी दिक्कत है - अरे सब लोग एक साथ दावा ले आएंगे लम्बे समय की ..."

उनके साथ बातचीत करते समय, यह स्पष्ट हो गया कि दवा दुकानदारों द्वारा उनके साथ अच्छा व्यवहार नहीं किया जा रहा है। सरकार की पहल के बारे में जागरूकता की कमी उन लोगोे को वंचित रहने का प्रमुख कारणों में से एक है जो इसका उपयोग नहीं कर पा रहे हैं। अंत में एक महिला बोली - आप तो हमलोग को एक महिला दिवस का गिफ्ट दे गए ||




दे हाथ सोसाइटी पिछले ३ साल से राधाग्राम में सामुदायिक विकास का काम कर रही है || वहां प्रोढ़-शिक्षा, स्वं-सहायता समूह के साथ अन्य कई छोटी परीयोजनायें चलती हैं |

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